महाभारत 9.13.12
ततोऽद्भुतशरज्वालो धनुःशब्दानिलो महान्सेनेन्धनं ददाहाशु तावकं पार्थपावकः
tato'dbhutaśarajvālo dhanuḥśabdānilo mahānsenendhanaṃ dadāhāśu tāvakaṃ pārthapāvakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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