महाभारत 9.13.18
हत्वा तु समरे पार्थः सहस्रे द्वे परंतपरथानां सवरूथानां विधूमोऽग्निरिव ज्वलन्
hatvā tu samare pārthaḥ sahasre dve paraṃtaparathānāṃ savarūthānāṃ vidhūmo'gniriva jvalan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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