महाभारत 9.13.20
द्रौणिस्तु समरे दृष्ट्वा पाण्डवस्य पराक्रमम्रथेनातिपताकेन पाण्डवं प्रत्यवारयत्
drauṇistu samare dṛṣṭvā pāṇḍavasya parākramamrathenātipatākena pāṇḍavaṃ pratyavārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें