महाभारत 9.13.21
तावुभौ पुरुषव्याघ्रौ श्वेताश्वौ धन्विनां वरौसमीयतुस्तदा तूर्णं परस्परवधैषिणौ
tāvubhau puruṣavyāghrau śvetāśvau dhanvināṃ varausamīyatustadā tūrṇaṃ parasparavadhaiṣiṇau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें