महाभारत 9.13.23
अन्योन्यस्पर्धिनौ तौ तु शरैः संनतपर्वभिःततक्षतुर्मृधेऽन्योन्यं शृङ्गाभ्यां वृषभाविव
anyonyaspardhinau tau tu śaraiḥ saṃnataparvabhiḥtatakṣaturmṛdhe'nyonyaṃ śṛṅgābhyāṃ vṛṣabhāviva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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