महाभारत 9.13.31
तमन्तकमिव क्रुद्धं परिघं प्रेक्ष्य पाण्डवःअर्जुनस्त्वरितो जघ्ने पञ्चभिः सायकोत्तमैः
tamantakamiva kruddhaṃ parighaṃ prekṣya pāṇḍavaḥarjunastvarito jaghne pañcabhiḥ sāyakottamaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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