महाभारत 9.13.34
सुधर्मा तु ततो राजन्भारद्वाजं महारथम्अवाकिरच्छरव्रातैः सर्वक्षत्रस्य पश्यतः
sudharmā tu tato rājanbhāradvājaṃ mahārathamavākiraccharavrātaiḥ sarvakṣatrasya paśyataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें