महाभारत 9.13.37
सुरथं तु ततः क्रुद्धमापतन्तं महारथम्चुकोप समरे द्रौणिर्दण्डाहत इवोरगः
surathaṃ tu tataḥ kruddhamāpatantaṃ mahārathamcukopa samare drauṇirdaṇḍāhata ivoragaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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