महाभारत 9.13.42ततः सज्जो महाराज द्रौणिराहवदुर्मदःअर्जुनं योधयामास संशप्तकवृतो रणेtataḥ sajjo mahārāja drauṇirāhavadurmadaḥarjunaṃ yodhayāmāsa saṃśaptakavṛto raṇeइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें