महाभारत 9.14.39
तत्राद्भुतं परं चक्रे शल्यः शत्रुनिबर्हणःयदेकः समरे शूरो योधयामास वै बहून्
tatrādbhutaṃ paraṃ cakre śalyaḥ śatrunibarhaṇaḥyadekaḥ samare śūro yodhayāmāsa vai bahūn
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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