महाभारत 9.15.24
शैनेयो दक्षिणं चक्रं धृष्टद्युम्नस्तथोत्तरम्पृष्ठगोपो भवत्वद्य मम पार्थो धनंजयः
śaineyo dakṣiṇaṃ cakraṃ dhṛṣṭadyumnastathottarampṛṣṭhagopo bhavatvadya mama pārtho dhanaṃjayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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