महाभारत 9.15.46
युधिष्ठिरस्तु मद्रेशमभ्यधावदमर्षितःस्वयं संचोदयन्नश्वान्दन्तवर्णान्मनोजवान्
yudhiṣṭhirastu madreśamabhyadhāvadamarṣitaḥsvayaṃ saṃcodayannaśvāndantavarṇānmanojavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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