महाभारत 9.16.2
ततः स शरवर्षेण पर्जन्य इव वृष्टिमान्अभ्यवर्षदमेयात्मा क्षत्रियान्क्षत्रियर्षभः
tataḥ sa śaravarṣeṇa parjanya iva vṛṣṭimānabhyavarṣadameyātmā kṣatriyānkṣatriyarṣabhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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