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महाभारत 9.16.45
घण्टापताकामणिवज्रभाजं; वैडूर्यचित्रां तपनीयदण्डाम्त्वष्ट्रा प्रयत्नान्नियमेन कॢप्तां; ब्रह्मद्विषामन्तकरीममोघाम्
ghaṇṭāpatākāmaṇivajrabhājaṃ; vaiḍūryacitrāṃ tapanīyadaṇḍāmtvaṣṭrā prayatnānniyamena kḷptāṃ; brahmadviṣāmantakarīmamoghām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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