महाभारत 9.18.17
अद्यप्रभृति पार्थांश्च प्रेष्यभूत उपाचरन्विजानातु नृपो दुःखं यत्प्राप्तं पाण्डुनन्दनैः
adyaprabhṛti pārthāṃśca preṣyabhūta upācaranvijānātu nṛpo duḥkhaṃ yatprāptaṃ pāṇḍunandanaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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