महाभारत 9.18.39
तेषामापततां तत्र संहृष्टानां परस्परम्संमर्दः सुमहाञ्जज्ञे घोररूपो भयानकः
teṣāmāpatatāṃ tatra saṃhṛṣṭānāṃ parasparamsaṃmardaḥ sumahāñjajñe ghorarūpo bhayānakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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