महाभारत 9.22.11
ते समन्तान्महाराज परिवार्य युधिष्ठिरम्अदृश्यं सायकैश्चक्रुर्मेघा इव दिवाकरम्
te samantānmahārāja parivārya yudhiṣṭhiramadṛśyaṃ sāyakaiścakrurmeghā iva divākaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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