महाभारत 9.22.26
अस्मांस्तु पुनरासाद्य लब्धलक्षा दुरासदाःशरासनानि धुन्वन्तः शरवर्षैरवाकिरन्
asmāṃstu punarāsādya labdhalakṣā durāsadāḥśarāsanāni dhunvantaḥ śaravarṣairavākiran
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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