महाभारत 9.22.2
तांस्तु यत्नेन महता संनिवार्य महारथान्पुत्रस्ते योधयामास पाण्डवानामनीकिनीम्
tāṃstu yatnena mahatā saṃnivārya mahārathānputraste yodhayāmāsa pāṇḍavānāmanīkinīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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