महाभारत 9.22.33
असौ सुबलपुत्रो नो जघनं पीड्य दंशितःसेनां निसूदयन्त्येष पश्य पाण्डव दुर्मतिम्
asau subalaputro no jaghanaṃ pīḍya daṃśitaḥsenāṃ nisūdayantyeṣa paśya pāṇḍava durmatim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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