महाभारत 9.22.36
ततो गजाः सप्तशताश्चापपाणिभिरास्थिताःपञ्च चाश्वसहस्राणि सहदेवश्च वीर्यवान्
tato gajāḥ saptaśatāścāpapāṇibhirāsthitāḥpañca cāśvasahasrāṇi sahadevaśca vīryavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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