महाभारत 9.22.38
ततस्तु सौबलो राजन्नभ्यतिक्रम्य पाण्डवान्जघान पृष्ठतः सेनां जयगृध्रः प्रतापवान्
tatastu saubalo rājannabhyatikramya pāṇḍavānjaghāna pṛṣṭhataḥ senāṃ jayagṛdhraḥ pratāpavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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