महाभारत 9.22.46
रुधिरोक्षितसर्वाङ्गा विप्रविद्धैर्नियन्तृभिःहयाः परिपतन्ति स्म शतशोऽथ सहस्रशः
rudhirokṣitasarvāṅgā vipraviddhairniyantṛbhiḥhayāḥ paripatanti sma śataśo'tha sahasraśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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