महाभारत 9.22.87
एवमन्योन्यमायस्ता योधा जघ्नुर्महामृधेपितॄन्भ्रातॄन्वयस्यांश्च पुत्रानपि तथापरे
evamanyonyamāyastā yodhā jaghnurmahāmṛdhepitṝnbhrātṝnvayasyāṃśca putrānapi tathāpare
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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