महाभारत 9.23.12
सर्वे विवृततूणीराः प्रगृहीतशरासनाःशरासनानि धुन्वानाः सिंहनादं प्रचक्रिरे
sarve vivṛtatūṇīrāḥ pragṛhītaśarāsanāḥśarāsanāni dhunvānāḥ siṃhanādaṃ pracakrire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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