महाभारत 9.23.18
समुद्रकल्पं तु बलं धार्तराष्ट्रस्य माधवअस्मानासाद्य संजातं गोष्पदोपममच्युत
samudrakalpaṃ tu balaṃ dhārtarāṣṭrasya mādhavaasmānāsādya saṃjātaṃ goṣpadopamamacyuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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