महाभारत 9.23.3
शकुनेस्तु वचः श्रुत्वा त ऊचुर्भरतर्षभअसौ तिष्ठति कौरव्यो रणमध्ये महारथः
śakunestu vacaḥ śrutvā ta ūcurbharatarṣabhaasau tiṣṭhati kauravyo raṇamadhye mahārathaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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