महाभारत 9.23.45
वधाय चात्मनोऽस्माभिः संयुगं रोचयिष्यतितदन्तं हि भवेद्वैरमनुमानेन माधव
vadhāya cātmano'smābhiḥ saṃyugaṃ rocayiṣyatitadantaṃ hi bhavedvairamanumānena mādhava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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