महाभारत 9.24.22
दृष्ट्वा तु हतविक्रान्तं स्वमनीकं महाबलःतव पुत्रो महाराज प्रययौ यत्र सौबलः
dṛṣṭvā tu hatavikrāntaṃ svamanīkaṃ mahābalaḥtava putro mahārāja prayayau yatra saubalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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