महाभारत 9.25.17
दृष्ट्वा तु निहतान्भ्रातॄन्बहूनेकेन संयुगेअमर्षवशमापन्नः श्रुतर्वा भीममभ्ययात्
dṛṣṭvā tu nihatānbhrātṝnbahūnekena saṃyugeamarṣavaśamāpannaḥ śrutarvā bhīmamabhyayāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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