महाभारत 9.26.1
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
दुर्योधनो महाराज सुदर्शश्चापि ते सुतःहतशेषौ तदा संख्ये वाजिमध्ये व्यवस्थितौ
duryodhano mahārāja sudarśaścāpi te sutaḥhataśeṣau tadā saṃkhye vājimadhye vyavasthitau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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