महाभारत 9.26.36
सत्यकर्माणमाक्षिप्य क्षुरप्रेण महायशाःततोऽस्य स्यन्दनस्येषां चिच्छिदे पाण्डुनन्दनः
satyakarmāṇamākṣipya kṣurapreṇa mahāyaśāḥtato'sya syandanasyeṣāṃ cicchide pāṇḍunandanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें