महाभारत 9.26.47
भीमस्तु समरे क्रुद्धः पुत्रं तव जनाधिपसुदर्शनमदृश्यं तं शरैश्चक्रे हसन्निव
bhīmastu samare kruddhaḥ putraṃ tava janādhipasudarśanamadṛśyaṃ taṃ śaraiścakre hasanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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