महाभारत 9.28.30
शक्त्यृष्टिप्रासहस्तानां बलानामभिगर्जताम्संकल्पमकरोन्मोघं गाण्डीवेन धनंजयः
śaktyṛṣṭiprāsahastānāṃ balānāmabhigarjatāmsaṃkalpamakaronmoghaṃ gāṇḍīvena dhanaṃjayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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