महाभारत 9.28.35
धृष्टद्युम्नस्तु मां दृष्ट्वा हसन्सात्यकिमब्रवीत्किमनेन गृहीतेन नानेनार्थोऽस्ति जीवता
dhṛṣṭadyumnastu māṃ dṛṣṭvā hasansātyakimabravītkimanena gṛhītena nānenārtho'sti jīvatā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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