महाभारत 9.28.39
अनुज्ञातस्त्वहं तेन न्यस्तवर्मा निरायुधःप्रातिष्ठं येन नगरं सायाह्ने रुधिरोक्षितः
anujñātastvahaṃ tena nyastavarmā nirāyudhaḥprātiṣṭhaṃ yena nagaraṃ sāyāhne rudhirokṣitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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