महाभारत 9.28.49
ब्रूयाः संजय राजानं प्रज्ञाचक्षुषमीश्वरम्दुर्योधनस्तव सुतः प्रविष्टो ह्रदमित्युत
brūyāḥ saṃjaya rājānaṃ prajñācakṣuṣamīśvaramduryodhanastava sutaḥ praviṣṭo hradamityuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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