महाभारत 9.28.52
एवमुक्त्वा महाराज प्राविशत्तं ह्रदं नृपःअस्तम्भयत तोयं च मायया मनुजाधिपः
evamuktvā mahārāja prāviśattaṃ hradaṃ nṛpaḥastambhayata toyaṃ ca māyayā manujādhipaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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