महाभारत 9.28.67
हाहाकारविनादिन्यो विनिघ्नन्त्य उरांसि चक्रोशन्त्यस्तत्र रुरुदुः क्रन्दमाना विशां पते
hāhākāravinādinyo vinighnantya urāṃsi cakrośantyastatra ruruduḥ krandamānā viśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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