महाभारत 9.28.81
ततः स रथमास्थाय द्रुतमश्वानचोदयत्असंभावितवांश्चापि राजदारान्पुरं प्रति
tataḥ sa rathamāsthāya drutamaśvānacodayatasaṃbhāvitavāṃścāpi rājadārānpuraṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें