महाभारत 9.29.5
युधिष्ठिरोऽपि धर्मात्मा भ्रातृभिः सहितो रणेहृष्टः पर्यपतद्राजन्दुर्योधनवधेप्सया
yudhiṣṭhiro'pi dharmātmā bhrātṛbhiḥ sahito raṇehṛṣṭaḥ paryapatadrājanduryodhanavadhepsayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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