महाभारत 9.3.3
विमुखे तव पुत्रे तु शोकोपहतचेतसिभृशोद्विग्नेषु सैन्येषु दृष्ट्वा पार्थस्य विक्रमम्
vimukhe tava putre tu śokopahatacetasibhṛśodvigneṣu sainyeṣu dṛṣṭvā pārthasya vikramam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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