महाभारत 9.30.38
त्वं चाश्वसिहि कौन्तेय ये चाप्यनुगतास्तवअहमुत्थाय वः सर्वान्प्रतियोत्स्यामि संयुगे
tvaṃ cāśvasihi kaunteya ye cāpyanugatāstavaahamutthāya vaḥ sarvānpratiyotsyāmi saṃyuge
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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