महाभारत 9.30.46
सुहृदस्तादृशान्हित्वा पुत्रान्भ्रातॄन्पितॄनपिभवद्भिश्च हृते राज्ये को नु जीवेत मादृशः
suhṛdastādṛśānhitvā putrānbhrātṝnpitṝnapibhavadbhiśca hṛte rājye ko nu jīveta mādṛśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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