महाभारत 9.30.64
आवयोर्जीवतो राजन्मयि च त्वयि च ध्रुवम्संशयः सर्वभूतानां विजये नो भविष्यति
āvayorjīvato rājanmayi ca tvayi ca dhruvamsaṃśayaḥ sarvabhūtānāṃ vijaye no bhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें