महाभारत 9.31.15
धर्ममूला सतां कीर्तिर्मनुष्याणां जनाधिपधर्मं चैवेह कीर्तिं च पालयन्प्रब्रवीम्यहम्
dharmamūlā satāṃ kīrtirmanuṣyāṇāṃ janādhipadharmaṃ caiveha kīrtiṃ ca pālayanprabravīmyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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