महाभारत 9.31.21
आनृण्यमद्य गच्छामि हत्वा त्वां भ्रातृभिः सहएतावदुक्त्वा वचनं विरराम जनाधिपः
ānṛṇyamadya gacchāmi hatvā tvāṃ bhrātṛbhiḥ sahaetāvaduktvā vacanaṃ virarāma janādhipaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें