महाभारत 9.31.36
स भित्त्वा स्तम्भितं तोयं स्कन्धे कृत्वायसीं गदाम्उदतिष्ठत पुत्रस्ते प्रतपन्रश्मिमानिव
sa bhittvā stambhitaṃ toyaṃ skandhe kṛtvāyasīṃ gadāmudatiṣṭhata putraste pratapanraśmimāniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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