महाभारत 9.32.14
वृकोदरं समासाद्य संशयो विजये हि नःन्यायतो युध्यमानानां कृती ह्येष महाबलः
vṛkodaraṃ samāsādya saṃśayo vijaye hi naḥnyāyato yudhyamānānāṃ kṛtī hyeṣa mahābalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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