महाभारत 9.32.44
अवशिष्टस्त्वमेवैकः कुलघ्नोऽधमपूरुषःत्वामप्यद्य हनिष्यामि गदया नात्र संशयः
avaśiṣṭastvamevaikaḥ kulaghno'dhamapūruṣaḥtvāmapyadya haniṣyāmi gadayā nātra saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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